Home 2022 जानिए पूजा का सही समय …आखिर दोपहर के समय पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

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जानिए पूजा का सही समय …आखिर दोपहर के समय पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

हिंदू धर्म शास्त्रों में पूजा में नियमों का पालन कर घर में सुख समृद्धि को बनाए रखने में साहयक होते है। पूजा देवताओं के सम्मान में की जाती है और किसी विशेष अवसर पर या निश्चित समय पर की गई पूजा देवताओं द्वारा भी स्वीकार्य की जाती है। पूजा पाठ से मन को शांत करने में मदद मिलती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पूजा करने से मन को शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है और घर में भी शांत वातावरण बनता है।

पूजा एक ऐसा आयोजन है जिसमें फूल चढ़ाने से लेकर, धूप प्रज्ज्वलित करने और भोग अर्पित करने की प्रक्रिया का पालन किया जाता है। पूजा करते समय श्लोकों का उच्चारण करने से मन की शांति मिलती है। पूजा -पाठ एक निश्चित दिनचर्या का पालन करने में आपकी मदद करता है।

पूजा का सबसे अच्छा समय

शास्त्रों के अनुसार पूजा करने के लिए सबसे अच्छा समय प्रातः काल को माना गया है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस समय तन और मन दोनों शांत होते हैं जिससे ईश्वर में ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इस समय का पूजन सीधे ईश्वर तक जाता है और मन की शुद्धि में मदद करता है।

दोपहर के समय देवताओं का पूजन क्यों न करें

यदि हम ज्योतिष के नियमों की मानें तो दोपहर 12 से 3 बजे का समय देवताओं के आराम का समय माना जाता है और इस समय यदि पूजन किया जाता है तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। इसके साथ ही, इस समय को ठीक नहीं कहा जाता है और ये पितरों का समय माना जाता है। इस वजह से इस विशेष समय अवधि में देवताओं की पूजा का विधान नहीं है। ऐसा माना जाता है कि दोपहर के समय पूजा-पाठ देवताओं को स्वीकार्य नहीं होता है।

दैनिक पूजा की सही विधि

– प्रातः काल पूजा से पहले स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें।
– ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने आराध्य को ध्यान में रखकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
– पूजा स्थल को साफ करें और सभी देवताओं को स्नान कराएं।
– पूजा के स्थान पर दीपक प्रज्वलित करें और पूजन श्रद्धानुसार पूजा आरंभ करें।
– सभी देवताओं का ध्यान करते हुए पूजन करें और दिन की शुभ शुरुआत करें।

– ज्योतिधचार्य विकास त्रिपाठी


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Author: Admin Editor MBC

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