Home 2022 जानिए कौन हैं तीनों लोकों की देवी मां अन्नपूर्णा

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जानिए कौन हैं तीनों लोकों की देवी मां अन्नपूर्णा

भोजन अर्थात अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा। इस दुनिया में हमारे जीवित रहने के लिए भोजन सबसे जरूरी चीज है। भोजन के बिना हम इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते। इसलिए, देवी अन्नपूर्णा की नित्य पूजा करनी चाहिए तथा आभार प्रकट करना चाहिए इससे मां अन्नपूर्णा की कृपा से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। जिन घरो पर अन्नपूर्णा देवी का आशीर्वाद रहता है, वे घर धन एवम धान्य से परिपूर्ण रहते हैं। विपत्ति के समय भी उनके घर कभी रसौई घर रिक्त नहीं रहता, अर्थात ऐसे घर के सदस्य धन की कमी के कारण कभी भूखे नहीं सोते।

पौराणिक मान्यता के अनुसार :

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार पृथ्वी पर सूखा पड़ गया ,जमीन बंजर हो गई। फसलें, फलों आदि की पैदावार ना होने से जीवन का संकट आ गया। तब भगवान शिव ने पृथ्वीवासियों के कल्याण के लिए भिक्षुक का स्वरूप धारण किया और माता पार्वती ने मां अन्नपूर्णा का अवतार लिया इसके बाद भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा में अन्न मांगा। इस अन्न को लेकर भगवान शिव पृथ्वी लोक पर गए और सभी प्राणियों में इसे बांट दिया इसके बाद धरती पर एक बार फिर से धन-धान्य हो गया। इसी के बाद से ही मास की पूर्णिमा तिथि को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाने के विधान की शुरुआत हुई।

कौन है मां अन्नपूर्णा:

‘मां अन्नपूर्णा’ मां पार्वती के रूप में प्रभु शिव से शादी की थीं। तब शादी के बाद शिव ने कैलाश पर्वत पर रहने का फैसला किया था लेकिन हिमालय की पुत्री पार्वती को कैलाश यानी कि अपने मायके में रहना पसंद नहीं आया इसलिए उन्होंने काशी, जो कि भोलेनाथ की नगरी कही जाती है, वहां रहने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद शिव उन्हें यहां लेकर आ गए। इसलिए काशी ही मां अन्नपूर्णा की नगरी कही जाती है। इसलिए कहा जाता है भोलेनाथ की नगरी में कोई भी भूखा नहीं रहता है।

पूजा विधि :

अन्नपूर्णा जयंती के दिन सुबह और सूर्योदय के बाद भी पूजा होती है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले रसोई घर को साफ-सुथरा करना चाहिए। इसके बाद गंगाजल छिड़क कर इसे पवित्र करें क्योंकि इस दिन रसोई घर में ही पूजा करने का विधान है। रसोई घर की पूर्व दिशा में एक लाल कपड़ा बिछाकर इसके ऊपर नव धान्य की ढ़ेरी बनाकर इसके ऊपर मां अन्नपूर्णा की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद इस स्थान पर एक जल से भरे तांबे के कलश में अशोक या आम के पत्ते और नारियल रखें ।

इस दिन गैस, चूल्हा या जिस पर भी खाना बनाते हों उसकी भी पूजा करें। अब घी का दीपक जलाएं, सबसे पहले मां अन्नपूर्णा को रोली से तिलक करें और लाल फूल अर्पित करें फिर चूल्हे पर भी रोली लगाकर तिलक करें और फूल चढ़ाएं भोग में मां अन्नपूर्णा को धनिया की पंजीरी और फल चढ़ाएं।

अन्नपूर्णा जयंती के दिन रसोई घर के चूल्हे की पूजा के बाद चावल की खीर बनाना शुभ माना जाता है इस खीर को संध्या पूजन में भोग लगाएं और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। कथाओं के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन माता पार्वती देवी अन्नपूर्णा के रूप में धरती पर प्रकट हुई थीं. इसलिए इस दिन माता पार्वती की अन्नपूर्णा यानी अन्न की देवी के रूप में पूजा की जाती है।

– सौम्या सिंह

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Author: Admin Editor MBC

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