किसी काम में आ रही हो बाधा या हो आर्थिक संकट, इनसे बचने के लिए रखें मां वैभव लक्ष्मी का व्रत
व्रत संकल्प :
सुहागिन स्त्रियो के लिए यह व्रत ज्यादा शुभकारी माना जाता है। व्रत का संकल्प लेने के दौरान मन में अपनी मनोकामना अवश्य कहनी चाहिए। भक्त को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार 11 या 21 शुक्रवार तक मां वैभव लक्ष्मी का व्रत जरूर करना चाहिए।
पूजा सामग्री :
माता लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरुप है तो मां वैभव लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें उसके बाद खुद के बैठने के लिए साफ़-सुथरा आसन, सोना और अगर सोना न हो तो चांदी की चीज़ और अगर चांदी भी न हो तो रुपया रखें। इसके बाद धूप, दीप, लाल रंग का फूल, चौकी या पाटा, लाल कपडा, कलश, एक कटोरी कलश पर रखने के लिए, घी, नैवेद्द, फल, हल्दी और कुमकुम रखें।
पूजा विधि :
मां वैभव लक्ष्मी की पूजा शाम के समय की जाती है। शुक्रवार को शाम को स्नान करने के बाद पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। स्त्री हो या पुरुष संध्या के समय पूर्व दिशा में मुहं करके आसन पर बैठ जाएं। और प्रसाद में चावल की खीर अवश्य बनाएं।
सामने पाटा रखकर उसपर कपड़ा बिछा लें और इस पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें। मां लक्ष्मी के बगल में श्रीयंत्र रखें। मां लक्ष्मी को सफेद वस्तुएं अतिप्रिय हैं। उस कपडे पर चावल का छोटा सा ढेर बना लें। उस ढेर पर पानी से भरा तांबे का कलश रखें और सोने, चांदी या फिर रुपया कटोरी में रखकर कलश के ऊपर रख दें। कलश के ऊपर रखी कटोरी में गहने या रुपये को हल्दी, कुमकुम और चावल चढ़ाकर पूजा करें। सफेद फूल और सफेद रंग की चीजों का भोग मां लक्ष्मी को लगाना चाहिए।
मां लक्ष्मी के सभी रूपों का चित्र और श्रीयन्त्र भी पूजा स्थान पर रख लें। सबसे पहले श्रीयंत्र और लक्ष्मी जी के विविध स्वरूपों का सच्चे दिल से दर्शन करें और उसके बाद लक्ष्मी स्तवन का पाठ करें।
ध्यान रखने योग्य बातें :
शुक्रवार वैभवलक्ष्मी व्रत में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है जैसे की अगर शुक्रवार के दिन आप प्रवास या यात्रा पर गए हो तो उस शुक्रवार को छोड़कर उसके बाद के शुक्रवार को व्रत करना चाहिए क्योंकि ये व्रत अपने घर पर ही करना चाहिए।
व्रत वाले दिन अगर कोई स्त्री रजस्वला या सूतकी हो तो उस शुक्रवार के छोड़कर उसके बाद वाले शुक्रवार को व्रत करना चाहिए। क्योंकि ये व्रत बिल्कुल शुद्ध होकर ही किया जाता है।
– सौम्या सिंह
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