#abhiyan_ pavitr_kashi : मांसाहार पुण्य है या पाप? जानिए गरुड़ पुराण क्या कहता है?
वो हिरण बहुत ही घबराया हुआ था। भगवान् श्री कृष्ण ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “क्या हुआ? तुम क्यों छुप रहे हो?”। उसका पीछा करते हुए एक शिकारी भी वहां आ पहुंचा और बोला यह मेरा शिकार है, इसे मुझे दे दो, इस पर मेरा अधिकार है।
तब भगवान् श्री कृष्ण बोले, “हर जीवित जीव पर उसका खुद का अधिकार होता है, न कि किसी का”। तब वह शिकारी क्रोध मे बोला, “यह मेरा शिकार है। इसे मै पकाकर खाऊंगा।”
तब भगवान् श्री कृष्ण बोले, “किसी भी जीव को मारकर खाना पाप की श्रेणी में आता है। क्या तुम पाप के भागी बनना चाहते हो? मांसाहार पुण्य है या पाप क्या तुम धर्म को नहीं जानते?”
तब वह शिकारी बोला,” मैं तुम्हारे जितना शिक्षित तो नहीं कि यह जानू कि मांसाहार पुण्य है या पाप पर मै यह जानता हूं कि जीव को मारकर खाना इसमे कोई हर्ज नहीं। मांसाहार से तो एक तो वह जीव को जीव बंधन से मुक्त कर रहा है। फिर क्यों मांसाहार से मना किया जाता है?
मांसाहारी होने को क्यों नहीं कहा जाता? वैसे भी मैं इसको मारकर नीच योनि से मुक्ति दिला कर पुण्य ही कमा रहा हूं। फिर इस पर पाबंदी क्यों? इसे तो प्रोत्साहित करना चाहिए। जहां तक मैंने सुना है जीव हत्या तो शास्त्रों मे भी बताया गया है। राजा लोग शिकार किया करते थे।”
ऐसे तमाम तर्क देते हुए श्री कृष्ण से पूछा कि फिर क्यों ये मांसाहार गलत है और पाप की श्रेणी में आता है? आप ही बताइए मांसाहार पुण्य है या पाप । भगवान् श्री कृष्ण समझ गए कि इसकी बुद्धि मांस खाने के कारण तामसिक हो गई है और उसने सोचने और समझने की बुद्धि भी खो दी है।
फिर भगवान् श्री कृष्ण बोले,” इस अंतहीन विषय पर पहले मैं कोई राय नहीं दूंगा। मेरी इस छोटी सी कथा सुनने के बाद तुम्हीं उत्तर देना कि मांसाहार पुण्य है या पाप और तुम्हें मांस खाना है या नहीं।”
वह शिकारी सोचने लगा कि इसमे मेरा तो कोई घाटा नहीं है। इस कथा को मैं सुन ही लेता हूं। मेरा मनोरंजन भी हो जाएगा और बाद में मुझे इसका मांस भी मिल जाएगा।
तो भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी कथा आरम्भ की। एक बार मगध मे खाद्य संकट खड़ा हो गया तो अन्न का उत्पादन कम रहा। राजा को चिंता हुई कि यदि इस समस्या का शीघ्र निदान नहीं किया गया तो संरक्षित अनाज कोष भी खत्म हो जाएगा। और संकट भीषण हो जाएगा।
तो सम्राट ने अपनी राज्य सभा मे पूछा, “देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है?” मंत्रीगण सोच मे पड़ गए। चावल, गेंहू, आलू इत्यादि पदार्थो को उगाने के लिए बहुत श्रम करना पड़ता है। वह तभी प्राप्त होते हैं जब प्रकृति का प्रकोप न हो। ऐसे में तो कुछ सस्ता हो ही नहीं सकता।
तभी शिकार का शौक रखने वाले एक मंत्री ने सोचा कि यही उत्तम अवसर है। क्यों न अंधाधुंध शिकार के लिए राजा की अनुमति ले ली जाए। उसने सभा मे कहा कि सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ है मांस। इसके लिए धन का खर्च भी नहीं है और पौष्टिक खाना भी मिलता है।
सभी सामंतों ने इस बात का समर्थन कर दिया लेकिन मगध के प्रधानमंत्री अभी भी चुप थे। सम्राट ने पूछा, “प्रधानमंत्री आप चुप क्यों हैं? आपने कोई अनुमोदन नहीं किया। आपका क्या मत है?”
प्रधानमंत्री ने कहा, “मै यह नहीं मानता कि यह कथन सही है कि मांस सबसे सस्ता पदार्थ है। फिर भी इस विषय पर मैं अपने विचार आपके सामने कल रखूँगा।”
प्रधानमंत्री उसी रात मांसाहार का प्रस्ताव रखने वाले सामन्त के घर पहुंचे। सामन्त ने इतनी देर रात प्रधानमंत्री को अपने घर आया देखा तो वह घबरा गया। किसी अनिष्ट की आशंका से वह कांप गया।
प्रधानमंत्री ने कहा,”संध्या को महाराज बीमार हो गए। उनकी हालत बहुत ही खराब है। राज वैद्य ने कहा है कि किसी शक्तिशाली देह का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बचाए जा सकते हैं।
आप महाराज के सबसे विश्वास पात्र हैं। इसीलिए आपसे योग्य कौन होगा? इसके लिए आप जो भी मूल्य लेना चाहें ले सकते हैं। आप कहें तो इस काम के लिए मैं आपको एक लाख स्वर्ण मुद्राएं भी दे सकता हूं।
एक बड़ी जागीर भी आप मांग सकते हैं। बस आप अपनी इच्छा कहें। मैं कटार से आपके हृदय को चीर कर बस दो तोला मांस निकाल लूंगा।”
यह सुनकर सामन्त के चेहरे का रंग फीका पड़ गया। वह सोचने लगा जब जीवन ही नहीं रहेगा तो लाख स्वर्ण मुद्राओं से मैं क्या करूंगा और बड़ी जागीर भी किस काम आएगी। वह झटपट अंदर भागा और अपनी तिजोरी से एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ लेकर आया।
मुद्राएं देकर उसने प्रधानमंत्री के पैर पकड़ लिए। और गिड़गिड़ाते हुए बोला, “श्रीमंत मैं आपकी एक लाख मुद्राओं मे अपनी एक लाख मुद्रा और मिलाता हूं। इस पैसे से आप किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद ले किन्तु मुझे जाने दे। यह बात किसी और को पता न चले। मैं आपसे आग्रह करता हूं।”
प्रधानमंत्री जी यह सब समझ चुके थे। वह उसे थोड़ी और मानसिक पीड़ा देना चाहते थे। प्रधानमंत्री ने आगे कहा,” सामन्त आप शरीर से बलिष्ठ हैं। आपकी कद काठी महाराज से मिलती जुलती है। इसीलिए राज वैद्य ने खास तौर पर आप ही का नाम लिया है। आपके दान से हमारे अच्छे राजा की जिंदगी बच सकती है। आप कहे तो मैं आपको प्रधानमंत्री का पद देने को तैयार हूं। और खुद आपका कर्मचारी बनकर रहूंगा। पर प्रजा से हमारे राजा न छीने।”
सामन्त तो फंसता हुआ दिख रहा था। उसने शरीर पर अंग वस्त्र रखकर अपने जूते भी पहन लिए। जैसे ही वह वहाँ से भागने वाला था वह तुरंत प्रधान मंत्री के पैरों मे लेट गया। उसने याचना की कि प्रधानमंत्री मैं इसके योग्य नहीं हूं। जब प्राण ही नहीं रहेंगे तो प्रधानमंत्री पद का या राजा का सिंहासन भी मिल जाए तो मैं उसका क्या करूंगा।
आप चाहें तो मेरा सब कुछ ले लें पर मेरे प्राण न लें। मैं अपना ये भवन और सारा धन आपको सौपता हूं। रातों रात राज्य से निकल जाऊँगा। इतना कहकर वह अपने घोड़े की ओर भागा। और जैसे ही अपना घोड़ा गठने लगा आवाज आयी अभी अभी अपने पीछे गए तुम अपने परिवार को भी छोड़े जा रहे हो।
सामंत बोला, “मेरे प्राण से प्रिय कुछ भी नहीं है। जब जीवन ही न रहेगा तो कुटुम्ब का क्या करूंगा? जीवन रहा तो ऐसे ही सुखी रह लूँगा।” इतना कहकर घोड़े पर छलांग लगाकर बैठ भी गया।
वह अभी चलने को ही था कि प्रधान मंत्री ने घोड़े की साख पकड़ ली। वह सामन्त से बोला, “भागने की जरूरत नहीं है। आप आराम से घर पर ही रहो। मैं किसी और का प्रयास करता हूं।” यह कहकर प्रधानमंत्री वहां से चले गए।
प्रधानमंत्री के वहां से जाने पर सामन्त के अंदर कुछ जान तो आयी परन्तु बैचेनी बनी रही। उसकी नींद खराब हो चुकी थी। मुद्राएं लेकर प्रधानमंत्री बारी बारी से सभी सामंतों के घर पहुंचे। और सभी से राजा के लिए हृदय का दो तोला मांस मांगा परन्तु कोई भी राजी न हुआ।
सबने अपने बचाव के लिए प्रधानमंत्री को लाख और पांच लाख मुद्राएं तक दे दी। इस प्रकार प्रधानमंत्री ने एक ही रात में करोड़ों स्वर्ण मुद्राएं जमा कर ली। फिर सुबह होने से पहले ही अपने महल में पहुंच गया।
अगले ही दिन राज सभा में सभी सामन्त समय से पहले ही पहुंच गए। सभी यह जानना चाहते थे कि राजा स्वस्थ है कि नहीं लेकिन कोई भी किसी से भेद नहीं खोलता था। सबको राज वैद्य की तलाश थी। उनसे ही उन्हें कुछ सूचना मिल सकती थी।
प्रधानमंत्री ने सैनिकों को आज्ञा दे रखी थी कि जब तक महाराज राज सभा मे न आये किसी भी सामन्त को भी महल से बाहर जाने की आज्ञा नहीं है।
राजा सभा में अपनी चिर परिचित गति मे आए और अपने सिंहासन पर आकर बैठे। सभी सामंतों ने देखा कहीं से भी राजा उन्हें अस्वस्थ नहीं लगे। उन्हें तो कुछ हुआ ही न था। प्रधानमंत्री ने उनसे झूठ बोला। हर सामन्त के मन में यही विचार चल रहा था। पर कोई भी किसी और को कुछ भी न बोल रहा था।
तभी प्रधानमंत्री ने राजा के समक्ष एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं रख दी। राजा ने पूछा, “ये स्वर्ण मुद्राएँ किसके लिए है और कहां से आयी।” प्रधानमंत्री ने कहा, “दो तोले मांस के लिए इतनी धनराशि जुटाई है पर मांस न मिला। अपनी जान बचाने के लिए सामंतों ने यह मुद्राएं दी हैं। अब आप यह विचार कीजिए मांस कितना सस्ता है?”
राजा को बात समझ में आ गयी। उन्होंने प्रजा को अतिरिक्त परिश्रम करने का निवेदन किया। और राजा के अनाज भंडार में से अनाज निकालकर श्रमिकों को दिया गया। उन्होंने पौष्टिक सब्जियों की खेती का तुरन्त आदेश दिया। वह एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं इसी कार्य के लिए और श्रमिकों के कल्याण के लिए खर्च की गई।
ऐसे साग सब्जी तेजी से उगी जिससे प्रजा का कल्याण भी हुआ और पौष्टिकता भी मिली। कुछ समय बाद मौसम अनुकूल हुआ और खेती लहलहाने लगी। इस प्रकार राज्य से खाद्य संकट दूर हुआ।
तो मित्रों, जीवन का यह मूल्य भगवान् श्री कृष्ण हमे इस कथा के जरिए समझाना चाहते हैं कि हम यह न भूले कि जिस तरह हमें अपनी जान प्यारी है उसी तरह सभी जीवों को अपनी जान प्रिय होती है।
अपने दिल से जानिए पराये दिल का हाल। यदि संसार के संबंधों से मुक्त करने का तर्क सही है, यदि जीव हत्या जीव को संसार बंधन से मुक्त करने का तरीका है तो अत्याचारी द्वारा किया गया नरसंहार भी मान्य है।
वह भी ये तर्क दे सकते हैं कि वह लोग जीवन के कष्ट से आप लोगों को मुक्त कर रहे हैं। अगर उसके लिए वह जीवन बोझ होता तो कभी भी अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष नहीं करता। आप से भागता नहीं। जो आपके सामने असहाय हो जाता है उसे प्राण गंवाने पड़ते हैं।
जिन जीवों को मारकर आप खा रहे हैं उन्हें तो प्राण बचाने का अवसर भी नहीं मिलता। बर्बरता सिर्फ वहीं नहीं है जहां सिर्फ मानव का रक्त बहता है। बर्बरता उसे भी कही जाती है जहां स्वार्थ के लिए किसी जीव की हत्या कर दी जाए।
हम अंत समय में जिंदगी भर के पापों के लिए जिन्दगी भर सुकर्म करने की कोशिश करते हैं परन्तु हम यह भूल जाते हैं कि जब वह जीव हमारे लिए काटा गया और हमारे लिए तड़पा। उसका श्राप हमे इस जीवन में ही नहीं बल्कि अगले जीवन तक नहीं छोड़ता।
परमात्मा से यह ज्ञान पाकर शिकारी परिपूर्ण हो गया और उसे ज्ञान की प्राप्ति हो गई। और वह जान गया कि महानता जीवन लेने मे नही बल्कि जीवन देने मे है। शिकारी भगवान् के आगे हाथ जोड़कर वहां से चला गया और उसने कसम खा ली कि वह अपने सम्पूर्ण जीवन में किसी को भी कभी चोट नहीं पहुंचाएगा।
नवीनतम जानकारी</span
#abhiyan_ pavitr_kashi : मांसाहार पुण्य है या पाप? जानिए गरुड़ पुराण क्या कहता है?
चाणक्य की बात : जिंदगी में कामयाबी के लिए गुरु की होती है जरूरत, जानें कैसे करें गुरु का चुनाव
किचेन की चीनी से करिये कुंडली में स्थित ग्रह दोषों का उपाय, मिलेगा राहत
अधिकमास में बना बेहद दुर्लभ खप्पर योग, किन राशियों को होगा लाभ और किनका हो सकता हैं नुकसान
पंचक्रोशी यात्रा विशेष : पंचक्रोशी यात्रा के पहले दिन ऐसे करें यात्रा पूर्ण
Adhik Maas 2023: अधिकमास में जन्मे बच्चे होते हैं भाग्यशाली, उनमें पाए जाते हैं ये विलक्षण गुण
Weekly Horoscope 24 To 30 July: जानें इस सप्ताह किन राशियों के चमकेंगे सितारे
Shukra Vakri 2023: सिंह राशि में शुक्र देव हुए वक्री, अब इन 3 राशियों की बढ़ेगी मुसीबतें
Adhik maas : जीवन में बदलाव के लिए पुरुषोत्तम मास में करिये तुलसी जी के 10 खास उपाय
जानिए वृहस्पति देव यानी गुरु वृहस्पति आपके जीवन में कैसे देते है सफलता
Puja-Path: पूजा में आलती-पालती मारकर ही क्यों बैठते हैं?
Weekly Vrat and Festivals : इस सप्ताह शुरू होगा मलमास, जानिए इस सप्ताह कौन कौन से है व्रत-त्योहार
Jyotish : जानिए उन चार राशि के जातकों को जिन्हें छुट्टी लेना और आराम करना है बेहद पसंद
Totaka उपाय : घर और दुकानों पर क्यों टांगते हैं नींबू-मिर्च? जानें ये दिलचस्प वजह
Mas parichay : जानिए पुरूषोत्तम मास मल मास या अधिक मास की कहानी, इस दौरान क्या करें और क्या न करें
इन 5 राशियों की लड़कियां जानें क्यों हो सकती हैं सबसे अच्छी पत्नी
Planet : कुंडली में शनि और सूर्य के साथ आने से बिगड़ने लगते हैं काम, जानिए क्या क्या होते है नुकसान
चाणक्य के बताये इन 6 सूत्रों को मान लिया तो जीवन की हर बाधा को चुटकी में कर लेंगे पार
शास्त्र से : पूरे दिन में जुबान पर इस समय बैठती है मां सरस्वती, कुछ भी बोलने से पहले रखें ध्यान
Guru Purnima: महर्षि वेदव्यास ने की थी गुरु पूर्णिमा की शुरुआत, जानें कैसे मनाएं यह पवित्र पर्व
Vastu Tips: घर के मुख्य द्वार पर हल्दी का स्वास्तिक, जानिए कैसे है ये आपके लिए फायदेमंद
जानकारी : कब चढ़ाना चाहिए भगवान को नारियल ?
Shani Temple: श्री राधा रानी से भूमि उधार लेकर बनवाया था शनिदेव ने अपना ये मंदिर
Vastu Tips: घर के मुख्य द्वार पर रखें पानी से भरा बर्तन, आएगी सुख समृद्धि
आखिर कैसे होता है किन्नरों का दाह संस्कार, जूतों से पिटाई का मतलब
श्रावण मास विशेष ( 4 जुलाई से 31 अगस्त तक )
सावन महीने में भूल से भी न करें ये गलतियां, भगवान शिव हो सकते हैं नाराज
Sawan tripund : शिव भक्त माथे पर क्यों लगाते हैं त्रिपुंड? त्रिपुण्ड की तीन लाइन का मतलब
Aadhyatm : भगवान शिव के पूजन में न चढ़ाएं कुमकुम, जानें इसके पीछे की वजहें
सावन मास में ये दिन हैं रुद्राभिषेक के लिए बेहद ख़ास, जानिये ध्यान देने वाली बातें
Sawan Somwar 2023: सावन के सोमवार पर करें राशि अनुसार दान, शिवजी का मिलेगा विशेष आशीर्वाद
Sawan Somvar Niyam: पाना चाहते हैं सावन सोमवार व्रत का पूरा फल, तो करें इन 5 नियमों का पालन
Savan : भगवान शिव के सामने करें ये एक काम, अनेकों परेशानियों से मिलेगी मुक्ति
href=”https://www.mokshbhumi.com/2023/7537/”>Sawan Horoscope : सावन के महीने में किन राशियों के चमकेंगे सितारे, जानें राशिफल
पौराणिक कथा : जानिए किसने की थी कावड़ यात्रा की शुरुआत, इस परंपरा से जुड़ी है ये चार कथा
मंदिर : इकलौता ऐसा शिव मंदिर जहां खड़े हैं नंदी, पढ़िए आखिर क्या है इससे जुड़ी कथा
Vastu Tips: जानिए क्या कहता है वास्तु, घर में शिव परिवार की तस्वीर रखना ठीक है ?
19 साल बाद इस दुर्लभ योग में दो महीने का होगा सावन, जानें क्यों पड़ रहा है दो बार सावन ?
देव स्थान : एम पी का पशुपतिनाथ महादेव का अद्भुत मंदिर, दुनियाभर में ये एकलौता शिवलिंग जिसके…
Savan mas : सप्ताह के सभी 7 दिन बरसेगी भोलेबाबा की कृपा, बस शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें
Atsro tips : विवाह का नहीं बन रहा है कोई योग या शादी में आ रही अड़चन तो सावन में करें ये उपायों
Sawan maas : इस बार का श्रावण है अद्भुत ! 59 दिन के श्रावण में 8 सोमवार
व्रत, तीज और त्यौहार
Chaturmas 2023: चातुर्मास आज से प्रारंभ, जानिए इसके मायने और महत्व
Shubh Muhurat July 2023: चातुर्मास लगने की वजह से जुलाई में किये जा सकते हैं सिर्फ ये शुभ कार्य
Raksha Bandhan 2023: इस साल दो दिन मनेगा रक्षाबंधन पर्व, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त
Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी का है खास महत्व, श्री कृष्ण भी बता चुके हैं इस व्रत के लाभ
Devshayani Ekadashi : आज देवशयनी एकादशी, भूलकर भी ना करें ये काम
Shukra Gochar : शुक्र का राशि परिवर्तन 7 जुलाई से, इन राशियों की चमकेगी किस्मत
दिन के अनुसार चुनें अपने कपड़ों का कलर, ग्रहों से है क्या रंगों का कनेक्शन
दैनिक पंचांग / राशिफल
Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 30 जुलाई 2023, रविवार
Aaj Ka Rashifal 30th July: इन राशियों पर रहेगी आज ईश्वर की विशेष कृपा
Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग और उपाय , 28 जुलाई 2023, शुक्रवार
चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
ग्रह चाल और आप
Vish Yog 2023: इन तीन राशियों के लिए है बेहद अशुभ, शनि और चंद्रमा की युति से बन गया है विष योग
Jyotish : आपके और जीवनसाथी की राशि है तो इसका ये होगा विवाह पर असर
Planet : आपकी परेशानियों के पीछे शनि और राहु की युति तो नहीं
धन, संपदा, लग्जरी लाइफ का भी प्रतिनिधि ग्रह शुक्र की वृषभ में बुध का गोचर, जानिए क्या होगा असर?
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
वास्तु शास्त्र ..
Astro tips : आखिर क्यों खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए ? पढ़िए क्या कहता है शास्त्र
Astro Tips : जानिये उन संकेत को जो बताते है आपका औरा है कमजोर
जानिए गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और पक्षी को खिलाने और पानी पिलाने से क्या है किस्मत का कनेक्शन
घर में सुख-शांति के लिए आजमाए वास्तु के ये कारगर उपाय
Vastu Tips: वास्तु पुरुष के मुख से निकलता रहता है तथास्तु, घर में कभी न बोलें बुरे वचन
पवित्र देव स्थान
Dev sthan : तेलंगाना में तैयार हो रहा है दुनिया का पहला 3 डी मंदिर
पत्थर रूप में ही क्यों शिंगणापुर में प्रकट हुए शनि पढ़िए पुरी कहानी
देव स्थान : बिना भगवान रथ पर बनें इस मंदिर के 56 स्तंभों से निकलता है संगीत..
एक मंदिर जहां नरसिंह देवता के पतले हो रहे हाथ, आखिर क्या है रहस्य, जानिए
जानिए आखिर कहां कहां है माता सीता का मंदिर, क्यों है ख़ास
धार्मिक मान्यतायें
Manglik ladka mangalik ladki : क्या यह जरूरी है कि मांगलिक लड़की का विवाह मांगलिक लड़के से ही हो?
Vastu Tips: जानिए किस दिशा की ओर होनी चाहिए जलते दीपक की लौ, क्या होते है इसके मायने
ज्ञानवापी मामला : जानिए पुरे मामले में अब तक क्या क्या हुआ ?
Ashadha Amavasya : आषाढ़ अमावस्या पर इन सरल उपायों से पितरों को करें खुश, उनकी कृपा से होगा उद्धार
जानिए किन कारणों से एकादशी के दिन नहीं खाते चावल
पूजा- पाठ : सूर्य देव की पूजा करने से मिलते हैं ये चार बड़े लाभ
जानिए क्या अंतर होता है पूजा और आरती के बीच में
Naked Bath: कभी भी न करें बिना कपड़े के स्नान, क्योंकि इनकी नाराजगी कर सकता है आपका नुकसान
Svapn vichar : सपने में खुद को आम खाते हुए देखने का क्या है मतलब? आम के सपने भी होते हैं ख़ास
Death in Dream: मौत के सपने आना और उसके प्रतीकात्मक अर्थ के गहरे रहस्यों के बारे में जानें
पूजा-पाठ के दौरान पत्नी को पति के किस तरफ बैठना चाहिए, आखिर क्या है वजह
जानिए आखिर प्रसाद लेने के बाद सिर पर हाथ क्यों घुमाते हैं ?
पौराणिक कथाएं
पौराणिक कथा – आखिर किसके श्राप की वजह से हुआ था रावण की लंका का दहन
पौराणिक कथा : क्या आप जानते हैं पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा नदी के उद्गम की कहानी
कुत्ता और मूषक को देवी-देवताओं ने अपनी सवारी चुना, मगर क्यों बिल्ली को किया नजरअंदाज
क्या आप जानते हैं शंख से शिवजी ने किया था विषपान! आज भी है मंदार पर्वत पर मौजूद
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व ?
Narad Jayanti: पढ़िए नारद मुनि के पत्रकार बनने की पौराणिक कथा, नारद मुनी थे पूर्व जन्म में….
Shri Ram Brother In Law: पौराणिक कथा में जानें कौन थे श्री राम के जीजा जी
” कर्पूर गौरम करुणावतारम ” मंत्र से मिलते हैं अनगिनत फायदे, जानें इसका मतलब और महत्व
राक्षसी होलिका, कैसे बनी एक पूजनीय देवी, जानें रोचक पौराणिक कथा
Mahabharat katha : आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
पौराणिक कथा में पढ़िए कौन है खाटू श्याम जी, क्या है उनकी कहानी और 11 अनजाने रहस्य
कौन थीं शबरी ? जानिए इनके माता पिता और गुरु को
महाभारत का युद्ध : आखिर 18 नंबर से क्या था कनेक्शन, क्यों चला था 18 दिन युद्ध ?
पौराणिक कथा : जानिए आखिर कैसे हुई थी श्री राधा रानी की मृत्यु ?
प्रयोग / उपाय / टोटका ..
Vastu Tips: किचन में इस्तेमाल होने वाला चकला- बेलन किस दिन खरीदें, जानें वास्तु से जुड़ी कुछ बातें
उपाय : खुशहाली के लिए महिलाएं सिंदूर से करें ये अचूक उपाय
यदि हैं आज कोर्ट कचहरी के चक्कर से परेशान, राहत के लिए आजमाये ये उपाय
J
छिड़कें दो चुटकी नमक, मिलेगा जोरदार तरक्की आपको अपने करियर में
Hari Elaichi Ke Upay: नाकामयाबी को दूर कर सकते हैं हरी इलायची के ये उपाय
अवश्य पढ़िए..
मंगलवार को न करें इन चीजों को खरीदने की भूल
Astro tips : गुरुवार को इन चीजों की खरीदारी को माना जाता है अपशकुन
Friday Shopping Rules: शुक्रवार को भूल से भी न खरीदें ये चीजें, हो सकता है परेशानी
घर में गंगाजल रखना है शुभ फिर क्यों गंगा मूर्ति रखने की है मनाही
जानिए जब आपके घर में दिखें ये संकेत तो आपके घर हो सकता है पितृ दोष
Wearing Tree Roots: ग्रहओं को शांत ही नहीं बीमारियों से मुक्त करते है इन पेड़ों की जड़
आखिर क्यों भंडारे में नहीं करना चाहिए भोजन, जानें असल कारण
अनोखा भंडारा : रात के अंधियारे में जलती चिताओं के बीच लोग ग्रहण करते हैं भंडारा, जानिए परंपरा
भंडारा : जानें कैसे हुई शुरुआत भंडारे की, क्या है इसे जुड़ी कथा
क्यों बद्रीनाथ में नहीं बजाया जाता शंख, जानें इसके पीछे का बड़ा रहस्य
क्या होता है पंचक, पंचक क्यों नहीं करते हैं ये पांच कार्य
जानिए हर दिन कौन कौन से पड़ते हैं काल, क्या हैं उनके नाम
शनिवार को शनि की साढ़ेसाती और ढैया के करिये ये उपाय
क्या आप भी किसी की हथेली पर बिना सोचे समझे रखते हैं कुछ भी सामान.. हो सकता हैं नुकसान
इन पांच लोगों से डरते हैं शनि देव, जानें कौन हैं ये
नई दुल्हन को काले कपड़े पहनने की क्यों होती है मनाही, जानें सही वजह
परेशानियों से बचने के लिए 5 वस्तुएं को सदा रखे तुलसी से दूर
ज्योतिष के अनुसार माथे पर चंदन का तिलक लगाने के फायदे
किनको और क्यों रखना चाहिए शिखा या चोटी, मिलता हैं ये लाभ…
भगवान विष्णु, राम और कृष्ण की तरह क्यों नहीं लगता महादेव के आगे ‘श्री’
शनि देव को शांत करने के पाँच प्रयोग, पढ़िए ब्रह्म पुराण’ में क्या कहते है शनिदेव
उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। अन्य लेख पढ़ने के लिए साथ ही अपनी सुझाव संग पसंद – नापसंद जरूर बताएं। साथ ही जुड़ें रहें हमारी वेबसाइट ” मोक्ष भूमि – काशी “ के साथ। हमारी टीम को आपके प्रतिक्रिया का इन्तजार है। 9889881111
डिसक्लेमर
M
इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता को जाँच लें । सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/ प्रवचनों /धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। जानकारी पूरी सावधानी से दी जाती हैं फिर भी आप पुरोहित से स्पस्ट कर लें।
Leave a Reply