Home 2025 Holi : आखिर किस गाँव से हुई होली की शुरुआत, कहां था असुर हिरण्यकश्यप का राज्य जहाँ विष्णु ने लिया अव

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Holi : आखिर किस गाँव से हुई होली की शुरुआत, कहां था असुर हिरण्यकश्यप का राज्य जहाँ विष्णु ने लिया अवतार

– By Dr santosh ojha

होली का इतिहास बहुत पुराना है और इसे लेकर पौराणिक कथाएं भी बहुत दिलचस्प हैं। इस त्योहार की कहानी भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार से जुड़ी है। भगवान विष्णु के अन्नय भक्त प्रह्लाद को बचाने की कहानी होली से जुड़ती है। लेकिन भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार के समय की ये जगह अभी कहां है, वहां अभी के हालात क्या है आइये जानते हैं…

हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है। कहते हैं कि यह सबसे प्राचीन उत्सव में से एक है। इस दिन असुर हरिण्याकश्यप की बहन होलिका का दहन हुआ था और प्रहलाद बच गए थे। इसी की याद में होलिका दहन किया जाता है। यह होली का प्रथम दिन होता है। कहते हैं कि यह घटना यूपी के एक गांव में घटी थी जहां पर इसी घटना की याद में एक मंदिर बना हुआ है जिसे 5 हजार वर्ष पुराना मंदिर माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के हरदोई के ककेड़ी गांव का 5000 साल से भी पुराना नृसिंह भगवान मंदिर, प्रहलाद घाट, हिरण्यकश्यप के महल का खंडहर, आज भी हैं। हरदोई जिले का पुराना नाम हरिद्रोही था। जो हिरण्यकश्यप की राजधानी थी।

हिरण्यकश्यप एक राक्षस था और वह भगवान विष्णु का कट्टर शत्रु था। पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के खिलाफ कई जुल्म किए थे और भगवान से बदला लेने के लिए उसने कई साज‍िशें रचीं थीं। हिरण्यकश्यप के बेटे प्रहलाद ने भगवान विष्णु की भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया, जो उसके पिता को बिल्कुल पसंद नहीं था। इसी कारण हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र प्रहलाद को मारने की कोशिश की, लेकिन भगवान की कृपा से वह हर बार सकुशल रहा।

सतयुग में हिरण्याकश्यप ने प्रहलाद की हत्या का सभी प्रयास विफल होते देख उसने अंत में उसे जलाकर मारने के लिए अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर उसे मारने का प्रयास किया। होलिका को ब्रह्मा से मिला वरदान था कि वह किसी भी तरह की आग से नहीं जलेगी लेकिन होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया। होलिका इसलिए जल गई क्योंकि उसका उद्देश्य पवित्र नहीं था। और यही घटना होली के त्योहार की उत्पत्ति का कारण बनी थी।

ककेड़ी गांव के इस मंदिर में भगवान नृसिंह की मूर्ति है। इसकी गवाही इसकी तमाम मूर्तियां और उनके कार्बन की उम्र देती है। हालांकि ककेड़ी गांव के मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार होता रहा है। आज भी इस गांव के लोग नृसिंह भगवान के मंदिर जाकर रंग लगाकर होली की शुरुआत करते हैं।

होली की शुरुआत हरदोई से होने की बात धार्मिक ग्रंथों और हरदोई गजेटियर में भी उल्लेखित है। हरदोई में भगवान विष्णु ने दो बार अवतार लिया था – पहला अवतार नरसिंह रूप में और दूसरा अवतार वामन रूप में। नरसिंह रूप में भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया था और उसके बाद इस स्थान पर प्रहलाद की रक्षा की थी।

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विश्वनाथ मंदिर  1.5 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km


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Author: Admin Editor MBC

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