Holi : आखिर किस गाँव से हुई होली की शुरुआत, कहां था असुर हिरण्यकश्यप का राज्य जहाँ विष्णु ने लिया अवतार
होली का इतिहास बहुत पुराना है और इसे लेकर पौराणिक कथाएं भी बहुत दिलचस्प हैं। इस त्योहार की कहानी भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार से जुड़ी है। भगवान विष्णु के अन्नय भक्त प्रह्लाद को बचाने की कहानी होली से जुड़ती है। लेकिन भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार के समय की ये जगह अभी कहां है, वहां अभी के हालात क्या है आइये जानते हैं…
हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि को होली का त्योहार मनाया जाता है। कहते हैं कि यह सबसे प्राचीन उत्सव में से एक है। इस दिन असुर हरिण्याकश्यप की बहन होलिका का दहन हुआ था और प्रहलाद बच गए थे। इसी की याद में होलिका दहन किया जाता है। यह होली का प्रथम दिन होता है। कहते हैं कि यह घटना यूपी के एक गांव में घटी थी जहां पर इसी घटना की याद में एक मंदिर बना हुआ है जिसे 5 हजार वर्ष पुराना मंदिर माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के हरदोई के ककेड़ी गांव का 5000 साल से भी पुराना नृसिंह भगवान मंदिर, प्रहलाद घाट, हिरण्यकश्यप के महल का खंडहर, आज भी हैं। हरदोई जिले का पुराना नाम हरिद्रोही था। जो हिरण्यकश्यप की राजधानी थी।
हिरण्यकश्यप एक राक्षस था और वह भगवान विष्णु का कट्टर शत्रु था। पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के खिलाफ कई जुल्म किए थे और भगवान से बदला लेने के लिए उसने कई साजिशें रचीं थीं। हिरण्यकश्यप के बेटे प्रहलाद ने भगवान विष्णु की भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया, जो उसके पिता को बिल्कुल पसंद नहीं था। इसी कारण हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र प्रहलाद को मारने की कोशिश की, लेकिन भगवान की कृपा से वह हर बार सकुशल रहा।
सतयुग में हिरण्याकश्यप ने प्रहलाद की हत्या का सभी प्रयास विफल होते देख उसने अंत में उसे जलाकर मारने के लिए अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर उसे मारने का प्रयास किया। होलिका को ब्रह्मा से मिला वरदान था कि वह किसी भी तरह की आग से नहीं जलेगी लेकिन होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया। होलिका इसलिए जल गई क्योंकि उसका उद्देश्य पवित्र नहीं था। और यही घटना होली के त्योहार की उत्पत्ति का कारण बनी थी।
ककेड़ी गांव के इस मंदिर में भगवान नृसिंह की मूर्ति है। इसकी गवाही इसकी तमाम मूर्तियां और उनके कार्बन की उम्र देती है। हालांकि ककेड़ी गांव के मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार होता रहा है। आज भी इस गांव के लोग नृसिंह भगवान के मंदिर जाकर रंग लगाकर होली की शुरुआत करते हैं।
होली की शुरुआत हरदोई से होने की बात धार्मिक ग्रंथों और हरदोई गजेटियर में भी उल्लेखित है। हरदोई में भगवान विष्णु ने दो बार अवतार लिया था – पहला अवतार नरसिंह रूप में और दूसरा अवतार वामन रूप में। नरसिंह रूप में भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया था और उसके बाद इस स्थान पर प्रहलाद की रक्षा की थी।
Holashtak : क्या है होलाष्ठक, क्यों मनाया जाता है होलाष्टक, इस दौरान करिये ये शुभ काम
होलाष्टक : जानिए होलाष्ठक के दौरान कौन से आठ ग्रह रहते हैं उग्र, क्या होता है इसका विपरीत असर
Holi : पढ़िए, होली पर्व से जुड़ी 21 वो प्रश्न जो अक्सर लोगों को करता है परेशान
विश्वनाथ मंदिर 1.5 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km
आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो आप इसे फेसबुक, व्हाट्सप्प पर शेयर और लाइक करें। ताकि 12 भाषा की काशी की पहली धार्मिक न्यूज़ पोर्टल “मोक्ष भूमि” की यह जानकारी दूसरे सनातनी को मिल सके
नवीनतम जानकारियां
Basi Bhojan : आखिर क्यों नहीं खाना चाहिए बासी भोजन, जानिए क्या कहता है शास्त्र
Chanakya ki baten : आजमाएं इन सात आदतों को, जो देती है अल्प समय में ही सफलता
Narad muni : जानिए नारद मुनि के जन्म की रोचक कथा, पूर्वजन्म और श्राप से क्या है संबंध
हनुमान जी की माता अंजना क्यों बनी अप्सरा से वानरी, कौन थे हैं हनुमान जी ने नाना
Hanuman Jyanti : हनुमान जी के पैर के नीचे किसका स्थान है ?
Lord Hanuman: जानिए आखिर तीन पत्नियों के बाद भी हनुमान जी क्यों कहलाते हैं बालब्रह्मचारी ?
Pradosh vrat : जानिए शनि प्रदोष पर पूजा का विधान, क्या है वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ
यदि पैर का अंगूठा और उसके पास वाली उंगली दोनों हो बराबर तो मिलता है ये लाभ …..
आखिर 7 दिनों का ही क्यों होता है सप्ताह, जानें इसकी खास वजह
Shaniwar : शनिवार करें ये उपाय, कष्ट होंगे दूर, जीवन में आएगी जबरदस्त बदलाव
Shani dev : आखिर क्यों शनि की सवारी है कौआ, क्या है इसका धार्मिक महत्व, कैसे हुआ शनि का जन्म ?
आखिर क्यों भोजन के समय बात करने की होती है मनाही? जानें क्या कहता है शास्त्र
जानिए मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद क्यों टूट जाता है सामने रखा शीशा?
Eksloki ramayan : एकश्लोकी रामायण में मात्र एक श्लोक में संपूर्ण राम कथा
शनि देव के प्रिय इस पौधे के हैं अनगिनत फायदे, मां लक्ष्मी की कृपा से बदल जाते हैं दिन
जानें आखिर शिव मंदिर में क्यों बजाते है ताली, ये है पौराणिक महत्व
Ullu : आपके घर पर यदि दिखा है उल्लू, तो जानिए क्या है इसके मायने ?
जब विष्णुजी के शरीर से कन्या का हुआ जन्म, जानिए कैसे उत्पन्न हुई एकादशी ?
भैरव को प्रसाद में शराब का चढ़ावा, षड्यंत्र है या परंपरा ? जानिए क्या है धर्म ग्रंथ में
Vastu shastra : कहां रखना चाहिए झाड़ू…? गलत जगह झाड़ू रखने से क्या होता है..
वास्तु : घर में दो शमी के पौधे रखना ठीक या गलत, जानें इसकी दिशा और ख़ास बातें
Ahoi ashtami : संतान प्राप्ति में हो रही है देरी, नहीं ठहरता है गर्भ, इस व्रत से मिलेगी सफलता
चाणक्य की बातें
चाणक्य की बातें : इन 4 तरह के आदतों के लोगों को हमेशा अपने घर से रखे दूर , वरना …
थोड़ा नुकसान उठा लीजिए, मगर जीवन में इन 7 लोगों से कभी मदद मत मांगिए
कथाएं रामायण की ..
Ramayan : श्री राम के अलावा इन योद्धाओं के हाथों मरते-मरते बचा था रावण
कथाएं महाभारत की ..
Mahabharata : क्या गांधारी के श्राप के कारण अफगानिस्तान का हुआ है ये हाल ?
महाभारत से : जानिए रहस्य, आखिर क्यों गंगा ने मार दिया था अपने 7 बेटों को
Mahabharat Katha: किस श्राप के कारण अर्जुन बन गए थे किन्नर?
क्या चीर हरण के समय द्रौपदी रजस्वला थी ? जानिये ‘बोल्ड’ द्रौपदी से जुडी पूरी बातें
जानिये किसका अवतार थीं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला
जब कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा मेरा दोष क्या था.? पढ़िए श्री कृष्ण का जवाब…
कौन हैं सुदर्शन चक्र ? जानें कैसे बने श्री कृष्ण का अस्त्र
महाभारत काल के वो पांच गांव, जिसकी वजह बना महाभारत युद्ध
निर्जला एकादशी : जानिए जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था एकादशी व्रत की जानकारी, फिर ..
Mata sarasvati : क्या ब्रह्माजी ने अपनी बेटी सरस्वती से विवाह किया था ? जानिए क्या है सच.
Basant Panchami 2024 : 14 फरवरी को बसंत पंचमी, जानिए मुहूर्त, मंत्र और वंदना
Basant Panchami 2024 : मां सरस्वती से मिलती है ये शिक्षा , जानिये कौन सी है शिक्षा?
Basant Panchami 2024 : बसंत पंचमी के दिन क्या करें और क्या न करें?
Leave a Reply