Chaitra month calendar : जानिए सनातन धर्म के पहले मास चैत्र के नामकरण की वजह, महत्व और धार्मिक पहलू
इस महीने में चैत्र नवरात्रि, राम नवमी, गणगौर, गुड़ी पड़वा, पापमोचिनी एकादशी आदि बड़े व्रत-त्योहार पड़ते हैं। इस माह में खरमास होने से एक महीने तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2025 में चैत्र का महीना कब से शुरू हो रहा है और इसका पौराणिक महत्व क्या है।
– चैत्र हिन्दू धर्म का प्रथम मास (महीना ) है। होली चैत्र मास के प्रतिपदा यानि पहले दिन होता है। जबकि होलिका दहन फाल्गुन मास के पूर्णिमा ( अंतिम दिन) क़ो।
– चित्रा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम चैत्र पड़ा।
– चैत्र मास को मधु मास के नाम से जाना जाता है। क्योंकि बसंत ऋतु का यौवन देखने को मिलता है।
– चैत्र में रोहिणी और अश्विनी शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है।
– देव प्रतिष्ठा के लिये चैत्र मास शुभ होता है।
चैत्र में गुड़ खाना मना बताया गया है। चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।
– महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार
“चैत्रं तु नियतो मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जायते।।”
अर्थात जो नियम पूर्वक रहकर चैत्रमास को एक समय भोजन करते बिताता है, वह सुवर्ण, मणि और मोतियों से सम्पन्न महान कुल में जन्म लेता है ।
– शिवपुराण के अनुसार चैत्र में गौ का दान करने से कायिक, वाचिक तथा मानसिक पापों का निवारण होता है।
चैत्र मास का शुक्ल पक्ष
– चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष का शुभारम्भ होता है। हिन्दू नववर्ष के चैत्र मास से ही शुरू होने के पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रह्मदेव ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। ताकि सृष्टि निरंतर प्रकाश की ओर बढ़े।
चैत्रमासि जगद् ब्रह्मा स सर्वा प्रथमेऽवानि ।
शुक्ल पक्षे समग्रं तत – तदा सूर्योदय सति ।।
– ब्रह्मपुराण
– नारद पुराण में भी कहा गया है की चैत्रमास के शुक्लपक्ष में प्रथमदिं सूर्योदय काल में ब्रह्माजी ने सम्पूर्ण जगत की सृष्टि की थी।
चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससज प्रथमेऽहनि ।।
शुक्लपक्षे समग्रं वै तदा सूर्योदये सति ।।
– चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। “कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा ।
रेवत्यां योग-विष्कुम्भे दिवा द्वादश-नाड़िका: ।। मत्स्यरूपकुमार्यांच अवतीर्णो हरि: स्वयम् ।।”
– चैत्र शुक्ल तृतीया तथा चैत्र पूर्णिमा मन्वरादि तिथियाँ हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
– भविष्यपुराण में चैत्र शुक्ल से विशेष सरस्वती व्रत का विधान वर्णित है ।
– चैत्र मास के दूसरे पखवारे यानि शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्र मनाये जाते हैं जिसमें व्रत रखने के साथ माँ जगतजननी की पूजा का विशेष विधान है।
– चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है।
– युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माना जाता है।
– मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हुआ था।
– युगाब्द (युधिष्ठिर संवत) का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को माना जाता है।
– उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् का प्रारम्भ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को किया गया था।
धर्म के नजर से
1. पुराणों के मुताबिक इस महीने में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप को पूजने का विधान है। इस महीने तपन नाम के सूर्य की पूजा की जाती है। सूर्य का ये रूप पाप नाशक और बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
2. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि और पूर्णिमा को मन्वादि तिथियां कहा गया है। यानी इस दिन किए गए दान से अक्षय पुण्य मिलता है।
3. भविष्य पुराण का कहना है कि इस महीने के शुक्ल पक्ष में सरस्वती पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान बढ़ता है।
4. वामन पुराण का कहना है कि चैत्र मास में ब्राह्मण भोजन, दक्षिणा और पान का दान करने का बहुत महत्व है। चैत्र मास में कपड़े, बिस्तर और आसन का दान करने से महा पुण्य मिलता है।
सफलता के उपाय
चैत्र माह में एक लाल कपड़े में 5 प्रकार के लाल फल रखकर किसी को दान करना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
चैत्र माह में पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करते हुए लाल रंग अर्पित करना चाहिए। इससे जीवन में शांति स्थापित होती है।
चैत्र माह में हर बृहस्पतिवार को केले के पेड़ की पूजा करते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
चैत्र माह में जानवरों को पानी पिलाने से अधिक पुण्य का काम और कुछ भी नहीं। इससे घर में मां लक्ष्मी का वास बना रहता है।
चैत्र माह में 108 बार अपने इष्ट देव का पान के पत्तों पर नाम लिखकर मंदिर में रखने से घर में वैभवता और ऐश्वर्य की स्थापना होती है।
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