Kanya pujan : मनोकामना पूर्ति हेतु करें इस विधि से कुमारी कन्याओं की पूजन, जानिए अष्टमी और नवमी तिथि का समय
बासंतिक नवरात्र में जगत जननी जगदंबा की महती कृपा प्राप्ति करने के लिए कुंवारी कन्याओं की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चन करने के पौराणिक मान्यता है। पुराणों में कन्या को देवी का स्वरूप माना गया है। भक्तगण नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चन करके आत्म कल्याण के साथ अपने मनोरथ की पूर्ति की कामना करते हैं। नवरात्र में व्रतकर्ता को व्रत समाप्ति पर हवन आदि के पश्चात कुंवारी कन्याओं एवं बटुक का विधि पूर्वक पूजन अर्चन किया जाता है। कुंवारी कन्याएं पुत्री शक्ति यानी महाकाली महालक्ष्मी मां सरस्वती देवी का स्वरूप माना गया है कुंवारी कन्याओं के साथ बटुकों के भी पूजा करने का नियम है। कुमारी पूजा करने नियम है। कन्याओं का चरण शुद्धजल में धोकर उन्हें लाल रंग की चुनरी अर्पित करना चाहिए। पूजन उपरांत उन्हें आभूषण नव वस्त्र मिष्ठान ऋतुफल मेवा नगद द्रव्य आदि भेंट करके उन्हें आशीर्वाद लिया जाता है।
इस बार अखंड नवरात्र में 9 दिनों का होने से महा अष्टमी का व्रत व पूजा शनिवार 5 अप्रैल वह महा नवमी की पूजा रविवार 6 अप्रैल को ही किया जाएगा। मां नवमी को श्री दुर्गा नवमी भी कहते हैं। जिन भक्तों ने नवरात्र में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ या नवरात्र का व्रत न किया हो वह नवमी के दिन पूर्ण आस्था व श्रद्धा भक्ति के साथ श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ वह व्रत करके मां भगवती की कृपा का लाभ उठा सकते हैं।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार 4 अप्रैल को रात्रि 8:13 पर लगेगी जो कि अगले दिन शनिवार 5 अप्रैल को शाम 7:27 तक रहेगी तत्पश्चात नवमी तिथि लग जाएगी जो कि रविवार 6 अप्रैल को शाम 7:24 तक रहेगी। नवरात्र व्रत का पारण दशमी तिथि को विधि विधान पूर्वक किया जाएगा।
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विश्वनाथ मंदिर 1.5 km, कालभैरव 2 km, संकटमोचन .75km, अस्सी घाट .50 km
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