अक्षय तृतीया के ही दिन क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा? 1200 साल पुराना है इससे जुड़ा इतिहास
अक्षय तृतीया के दिन क्यों खुलते हैं कपाट
आज से लगभग 1200 साल पहले प्रसिद्ध श्री आदि शंकराचार्य ने चार धाम की स्थापना की थी। जिसके बाद से इस तीर्थयात्रा के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा और दर्शन किया जाता है। इस यात्रा की शुरूआत अक्षय तृतीया के दिन से होती है। दरअसल पुराणों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही त्रेतायुग की शुरूआत हुई थी। इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार तब से लेकर आज तक इसी दिन चार धामों के कपाट खुलते आ रहे हैं।
कैसे करें चारधाम यात्रा की शुरुआत
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरु हरिद्वार से की जाती हैं। जहां श्रद्धालु सबसे पहले गंगा स्नान करके खुद को पवित्र करते हैं। गंगा स्नान के बाद यहां से मां यमुना के धाम के लिए यानि यमुनोत्री के लिए निकलते हैं। जहां से बाबा केदार के दरबार में हाजिरी लगाई जाती है। इसके अंतिम धाम यानि बद्रीनाथ धाम में दर्शन करके अपनी चारधाम यात्रा को पूरा किया जाता है। पहले के समय में सुख सुविधा न होने के कारण यह यात्रा पूरी करने में बहुत ज्यादा समय लग जाता था, लेकिन अब ट्रांसपोर्ट और सरकार द्वारा कई तरह की सुविधाएं होने के कारण आप 10 से 12 दिन में भी यह यात्रा आराम से पूरी कर सकते हैं।
चार धाम यात्रा का समय छह महीने के कपाट बंद के बाद आखिरकार 22 अप्रैल से एक बार फिर चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। जिसके दौरान चार धाम बद्रीनाथ, गंगोत्री, केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसके बाद 25 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 27 अप्रैल के दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।
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